Saturday, December 19, 2009

मेरी नजर से: भारत का भरोसा द्रविड़

क्रिकेट मेरा सब से ज्यादा पंसदीदा खेल है और द्रविड़ मेरा पसंदीदा क्रिकेटर है तो जब मेने किसी स्पोर्ट्समेन के बारे में पढने का मन हुआ, तो मेरे को द्रविड़ के लिए कुछ पढने का मन हुआ
ये किताब वेदम जयशंकरने २००३ के अंत में लिखी हुई हैवे इंडियन एक्सप्रेस के मुख्य क्रिकेट सवांददाता और रेडियो/टीवी में कमेंट्री कर चुके हैद्रविड़ को वो बचपन से, १३ साल की उम्र से जानते है जब से द्रविड़ने गंभीरता से क्रिकेट खेलना शुरू किया, वर्ना द्रविड़ स्कुल में तो बहुत अछि होकी भी खेलते थेद्रविड़ के बारे में पढ़ते हुए लगा की एक पढने लिखने में होशियार और आग्याकिंत लड़का क्रिकेटर कैसे बन सकता है!!! उसे तो किसी कोर्पोरेट ऑफिस में होना चाहिए थाहालाँकि इस किताब में बहुत की कम बाते ऐसे थी जो मुझे पता नहीं थीबस इतना पता चला की द्रविड़ बचपन से सुलजे हुए है, बहुत ही आयोजन बध्ध हैये किताब साल पुरानी है और मुझे द्रविड़ की २००७ के वर्ल्डकप के बाद के बारे में उन के विचार, इंग्लैंड के सफल दौरे के बाद उनके इस्तीफे और वनडे टीम से निकाले जाने के बाद की जिन्दगी के बारे में जानना चाहता हु पर वो तो जब द्रविड़ खुद लिखेंगे तभी पता चलेगा पर उनकी पेर्सोनालिटी को देखते हुए लगता नहीं की वो ये सब बाते पब्लिक में कहेंगे.....

2 comments:

Alpesh Bhalala said...

અરે યાર દ્રવિડની જેમ તું તો રીડીંગ મશીન લાગે છે ! કેટલા કલાક વાંચે છે ? તારું હિન્દી પણ ગમ્યું !

Anish Patel said...

Thank you sir for appreciation on my hindi and about reading... come to mumbai and u will also start reading because of long commuting hours.. :) .... plus I go surat on every weekend... 4 hours journey at one end so 8 hours both end.. see... I get more time now.... so that the reason of being reading machine...